प्रदेश के छह मंडलों में आयुष महाविद्यालय की होगी स्थापना: आदित्यनाथ

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय “महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय” का किया लोकार्पण

0
313

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि जहां आयुष पद्धति का कोई महाविद्यालय नहीं है, उन मंडलों में भी आयुष पद्धति का एक-एक महाविद्यालय स्थापित किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में स्थापित प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के लोकार्पण समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ और प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में “महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय” का लोकार्पण किया। इसे 268 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है।

इस मौके पर योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में छह मंडल ऐसे हैं, जहां आयुष पद्धति का कोई महाविद्यालय नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि उन मंडलों में एक-एक आयुष पद्धति का कॉलेज स्थापित किया जाएगा। योगी ने कहा कि हर जनपद में आरोग्यता के लिए एक “हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर” बनेगा, जो कम से कम 100 बिस्तरों का होगा। भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों की उपेक्षा के लिए विपक्षी दलों की पूर्ववर्ती सरकारों पर ठीकरा फोड़ते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हम सब जानते हैं कि 2014 से पहले भारत के आरोग्‍यता की इस विधा को वैश्विक रूप से जिस प्रकार मान्‍यता मिलनी चाहिए थी, नहीं मिल पाई।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके विकास का श्रेय देते हुए कहा, “हम आभारी हैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने के साथ ही देश के अंदर आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्‍सा और योग के साथ दुनिया की तमाम परंपराओं को आयुष मंत्रालय के रूप में देश के अंदर एक मंच दिया।” योगी ने कहा, “आज आयुष मंत्रालय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देश के नागरिकों में अपनी परंपरागत आरोग्‍यता की पद्धति का मनन करते हुए लक्ष्य को प्राप्त कर रहा है।” मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा, “यह प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय है। परंपरागत पद्धति से जुड़े महाविद्यालयों को इस विवि से सम्बद्ध कर लिया गया है और यहां आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा आदि अन्य पद्धतियों से जुड़ी आरोग्‍यता का लाभ न केवल यहां के लोग ले पाएंगे, बल्कि यह एक शोध केन्‍द्र के रूप में विकसित होगा। यह नौजवानों के रोजगार के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।” उन्होंने प्रदेश के नागरिकों और विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर से राष्ट्रपति और राज्यपाल को बधाई दिया। उन्होंने कहा कि यह गौरव का विषय है कि राष्ट्रपति ने कल गोरखपुर ‘एम्स’ के पहले दीक्षांत समारोह में सहभागिता की और वहां से निकलने वाले चिकित्सकों को अपना मार्गदर्शन दिया और आज भटहट में न केवल यहां के स्थानीय नागरिकों बल्कि पूरे प्रदेश को मार्गदर्शन मिलेगा। योगी ने बताया कि जब हम भारत की आयुष पद्धति की बात करते हैं तो आयुर्वेद, रस शास्त्र और आयुर्विज्ञान का अविष्‍कार नवनाथ चौरासी सिद्धों की परंपरा से जुड़ता है, जिसको व्यवस्थित स्वरूप देकर भगवान गोरखनाथ ने नेतृत्व दिया था। गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान गोरखनाथ के नाम से बने इस आयुष विश्‍वविद्यालय से भारत की परंपरागत आरोग्‍यता की विधा का लाभ हमारा नौजवान ले सके, भारत प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप एक नए आरोग्य केंद्र के रूप में दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर सके, इस दृष्टि से यह विश्वविद्यालय एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें